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कहानी
उपन्यास
नाटक
हिन्दी-एकांकी
हास्य-व्यंग्य
आत्मकथा
संस्मरण
यात्रा-व्रतान्त
निबंध
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यात्रा-व्रतान्त
निबंध
1. देवदास उपन्यास
1917 में लिखा गया यह उपन्यास शरत चंद्र की कलम से निकला हुआ एक महान उपन्यास है । प्रेम और त्याग की भावना के प्रतीक इस उपन्यास की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस उपन्यास पर अब तक तीन फिल्में बन चुकी है।
1917 में लिखा गया यह उपन्यास शरत चंद्र की कलम से निकला हुआ एक महान उपन्यास है । प्रेम और त्याग की भावना के प्रतीक इस उपन्यास की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस उपन्यास पर अब तक तीन फिल्में बन चुकी है।
महादेवी वर्मा को छायावाद के चार सतम्भो में गिना जाता है । उनकी मशहूर रचनाओं में अतीत के चलचित्र , समृति की रेखाएं मुख्य है, वहीं काव्य संग्रहों में निहार, रश्मि, नीरजा एवं संध्या गीत मुख्य है।
4. सुभद्रा कुमारी चौहान की कवितायेँ
भला कौनसा भारतवासी होगा जिसने झाँसी की रानी कविता नही सुनी होगी !
एक ऐसी कविता जिसे सुनकर एक सच्चे हिन्दुस्तानी का खून आज भी खौल उठता है। जो आज भी रगों में जोश भर देती है।
ये कविता सुभद्रा जी की कलम से ही निकल सकती थी।
ऐसी ही कई कविताओं का संग्रह है ये पुस्तिका।
भला कौनसा भारतवासी होगा जिसने झाँसी की रानी कविता नही सुनी होगी !
एक ऐसी कविता जिसे सुनकर एक सच्चे हिन्दुस्तानी का खून आज भी खौल उठता है। जो आज भी रगों में जोश भर देती है।
ये कविता सुभद्रा जी की कलम से ही निकल सकती थी।
ऐसी ही कई कविताओं का संग्रह है ये पुस्तिका।
सन १८८२ में प्रकाशित बंकिम चंद्र चटोपाध्याय द्वारा लिखित यह उपन्यास भारतीय इतिहास के उन दुर्लभ दस्तावेजोंमें से एक है जिन्होंने समाज को एक नई दिशा देने का काम किया। इस उपन्यास को सन्यासी आन्दोलन और बंगाल अकाल की छाया में लिखा गया है।
भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम इसी उपन्यास से लिया गया है।
यह पुस्तक हर भारतीय को जरूर पढ़नी चाहिए ।
भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम इसी उपन्यास से लिया गया है।
यह पुस्तक हर भारतीय को जरूर पढ़नी चाहिए ।
मनुष्य में सदा से ही अपने भाग्य को जानने की इच्छा रही है और हसतरेखा इसका एक अच्छा माध्यम है । ह्सतरेखा विज्ञानं प्राचीन काल से ही भारत में लोकप्रिय है । भारत ही इसका जन्मदाता है । यहाँ तक कि विश्व प्रसिद हसतरेखा विशेषज्ञ कीरो ने भी इस ज्ञान को भारत में ही आकर सीखा था ।
किसी भी व्यक्ति के हाथ को देखकर उसके जीवन की कमियों का पता लगाया जा सकता है और उनको दूर भी किया जा सकता है। यदि समय रहते समस्या पता लग जाए तो उसका समाधान भी आसन हो जाता है।
अत्यन्त सरल भाषा में लिखी हुई २०० पन्नों की प्रस्तुत पुस्तक जिज्ञासु पाठको को अवश्य पसंद आयेगी ।
किसी भी व्यक्ति के हाथ को देखकर उसके जीवन की कमियों का पता लगाया जा सकता है और उनको दूर भी किया जा सकता है। यदि समय रहते समस्या पता लग जाए तो उसका समाधान भी आसन हो जाता है।
अत्यन्त सरल भाषा में लिखी हुई २०० पन्नों की प्रस्तुत पुस्तक जिज्ञासु पाठको को अवश्य पसंद आयेगी ।
अंक विधा से अपना भविष्य जानिए।
संसार का प्रारम्भ अंक से ही हुआ है । इसलिए अंक का बड़ा महत्व है। अंक के बिना किसी भी कार्य का शुभारम्भ सम्भव नही है।
जो व्यक्ति अंको के रहस्य को जान लेता है, वो हमेशा सुखी जीवन बिताता है। ज्योतिष एवं अंक विज्ञानं में रूचि रखने वालो को ये पुस्तक अवश्य पसंद आयेगी।
संसार का प्रारम्भ अंक से ही हुआ है । इसलिए अंक का बड़ा महत्व है। अंक के बिना किसी भी कार्य का शुभारम्भ सम्भव नही है।
जो व्यक्ति अंको के रहस्य को जान लेता है, वो हमेशा सुखी जीवन बिताता है। ज्योतिष एवं अंक विज्ञानं में रूचि रखने वालो को ये पुस्तक अवश्य पसंद आयेगी।
अंधायुग धरमवीर भारती की एक प्रसिद रचना है। महाभारत की १८ वीं संध्या से लेकर कृष्ण की मृत्यु के समय तक की ये गाथा अपने आप में एक एतिहासिक धरोहर है।
कनुप्रिया भी धरमवीर भारती की एक अमर कृति है। इसे भी हर हिन्दी साहित्य प्रेमी को अवश्य पढ़ना चाहिए।
10. कुरुक्षेत्र - रामधारी सिंह दिनकर
रामधारी सिंह 'दिनकर' , हिन्दी काव्य जगत के प्रमुख स्तम्भ है। इनका महाकाव्य 'कुरुक्षेत्र'आधुनिक युग की गीता है। गीता की तरह कुरुक्षेत्र में भी निष्काम कर्म की प्रेरणा दी गई है। कुरुक्षेत्र की कथावस्तु महाभारत के नर-संहार और ध्वंस के उपरांत की घटना पर आधारित है। महाभारत में भीषण नर-संहार देख कर युधिष्ठर के ह्रदय में ग्लानि और पश्चात्ताप की भावना उत्पन्न हो जाती है। वे सोचते है कि यह ध्वंस और नर-संहार उन्ही के वजह से हुआ । तब वे शान्ति और समाधान के लिए युद्घ भूमि में शर -शय्या पर लेटे हुए भीष्म -पितामह के पास जाते है। भीष्म उनका समाधान करते है और युधिष्ठर को निष्काम कर्म की प्रेरणा देते है। कुरुक्षेत्र की कथा सात सर्गो में विभक्त है।
रामधारी सिंह 'दिनकर' , हिन्दी काव्य जगत के प्रमुख स्तम्भ है। इनका महाकाव्य 'कुरुक्षेत्र'आधुनिक युग की गीता है। गीता की तरह कुरुक्षेत्र में भी निष्काम कर्म की प्रेरणा दी गई है। कुरुक्षेत्र की कथावस्तु महाभारत के नर-संहार और ध्वंस के उपरांत की घटना पर आधारित है। महाभारत में भीषण नर-संहार देख कर युधिष्ठर के ह्रदय में ग्लानि और पश्चात्ताप की भावना उत्पन्न हो जाती है। वे सोचते है कि यह ध्वंस और नर-संहार उन्ही के वजह से हुआ । तब वे शान्ति और समाधान के लिए युद्घ भूमि में शर -शय्या पर लेटे हुए भीष्म -पितामह के पास जाते है। भीष्म उनका समाधान करते है और युधिष्ठर को निष्काम कर्म की प्रेरणा देते है। कुरुक्षेत्र की कथा सात सर्गो में विभक्त है।
11. सांझ - जगदीश गुप्त
आधुनिक हिन्दी कविता में डाक्टर जगदीश गुप्त का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इनका जन्म १९२४ में शाहाबाद हरदोई में हुआ।आपने प्रयाग विश्वविद्यालय से एम।ए।, डी।फिल। की उपाधि प्राप्त की। आपको मैथिली शरण गुप्त सम्मान तथा श्री नारायण चतुर्वेदी सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। आपने पचास से अधिक पुस्तकों का लेखन-संपादन किया है।
आपका प्रबंध काव्य सांझ है ।
आधुनिक हिन्दी कविता में डाक्टर जगदीश गुप्त का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इनका जन्म १९२४ में शाहाबाद हरदोई में हुआ।आपने प्रयाग विश्वविद्यालय से एम।ए।, डी।फिल। की उपाधि प्राप्त की। आपको मैथिली शरण गुप्त सम्मान तथा श्री नारायण चतुर्वेदी सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। आपने पचास से अधिक पुस्तकों का लेखन-संपादन किया है।
आपका प्रबंध काव्य सांझ है ।
ABCD उपन्यास रविंदर कालिया द्वारा लिखित एक बेहतरीन उपन्यास है. इसमे पारिवारिक रिश्तों के ताने -बाने को बुना गया है. एक बार पढ़कर अवश्य देखें.
गुलज़ार साहब को कौन नही जानता। उनका अपना ही एक अंदाज़ है। देखिये-
सामने आए मेरे, देखा मुझे, बात भी की
मुस्कराए भी, पुरानी किसी पहचान की खातिर
कल का अखबार था, बस देख भी लिया, रख भी दिया।
कुछ ऐसी ही त्रिवेणियों का संकलन है ये पुस्तक।
सामने आए मेरे, देखा मुझे, बात भी की
मुस्कराए भी, पुरानी किसी पहचान की खातिर
कल का अखबार था, बस देख भी लिया, रख भी दिया।
कुछ ऐसी ही त्रिवेणियों का संकलन है ये पुस्तक।
विरहपूर्ण गीतों की गायिका महादेवी वर्मा आधुनिक युग की मीरा कही जातीहै।'निहार में उनकी प्रारंभिक कविताओं का संग्रह है। इस काव्य संग्रह में प्रकृति मेंमानवीय भावनाओं की भव्य झांकियां एवं विरह वेदना के चित्र प्रस्तुत किये गए है ।यहाँ पर 'निहार' को ई -पुस्तक के रूप में दिया जा रहा है। आशा है कि इसके माध्यमसे महादेवी वर्मा के साहित्य के सौन्दर्य को समझने में सहायता मिलेगी ।
भला ईश्वरचंद्र विद्यासागर को कौन नही जानता ? उनके बहुत सारे प्रेरक प्रसंग आपने भी पढ़े होंगे। वे सही मायने में एक महापुरुष थे। उनकी उदारता के किस्से बहुत मशहूर है। उन्होंने समाज हित में बहुत काम किए। उनके जीवन की बहुत सी घटनाओ का रोचक वर्णन इस छोटी सी पुस्तक में किया गया है।
यह पुस्तक हर किसी के पढने लायक है। यह पुस्तक पढने में इतनी रोचक हैकि आप एक बार शुरू करने के बाद इसे खत्म करके ही दम लेंगे ।
यह पुस्तक हर किसी के पढने लायक है। यह पुस्तक पढने में इतनी रोचक हैकि आप एक बार शुरू करने के बाद इसे खत्म करके ही दम लेंगे ।
चंद्रकांता उपन्यास से देश-विदेश में प्रसिदी प्राप्त करने वाले देवकीनंदन खत्री का उपन्यास है - कटोरा भर खून।
(कृपया चंद्रकांता डाउनलोड करने के लिए हमारी पिछली पोस्टें देखें)
कटोरा भर खून -
जिसके लिए एक बाप अपनी बेटी का कत्ल करने को तैयार हो गया।
कटोरा भर खून -
जिसके लिए जाने कितने षडयंत्र रचे गए।
कटोरा भर खून -
जिसने कई जिंदगियां तबाह कर दी।
आख़िर क्या था इसका सच ?
(कृपया चंद्रकांता डाउनलोड करने के लिए हमारी पिछली पोस्टें देखें)
कटोरा भर खून -
जिसके लिए एक बाप अपनी बेटी का कत्ल करने को तैयार हो गया।
कटोरा भर खून -
जिसके लिए जाने कितने षडयंत्र रचे गए।
कटोरा भर खून -
जिसने कई जिंदगियां तबाह कर दी।
आख़िर क्या था इसका सच ?
जयशंकर प्रसाद के शिष्य रहे प्रसिद कहानी लेखक विनोदशंकर व्यास की लगभग सभी कहानिया इस संग्रह में शामिल है। ३०० पन्नो की इस पुस्तक में उनकी पचास कहानियाँ दी हुई है। सभी कहानियाँ पढने में रोचक है।
उम्मीद है इससे पाठकों का मनोरंजन होगा।
उम्मीद है इससे पाठकों का मनोरंजन होगा।
इस कहानी संग्रह में हिन्दी भाषा की १२ महान कहानियों का संग्रह है . ये कहानियाँ विभिन्न प्रसिद्ध लेखकों की है जैसे कि - जयशंकर प्रसाद , जैनेन्द्र, चतुरसेन शास्त्री , विशम्भरनाथ शर्मा "कौशिक" इत्यादि। इन कहानियों में प्रमुख है-
राजपूतनी का प्रायश्चित
विद्रोही
ब्याह
पछतावा
फूटा शीशा इत्यादि
राजपूतनी का प्रायश्चित
विद्रोही
ब्याह
पछतावा
फूटा शीशा इत्यादि
1. हीर-राँझा
2. सोहनी- महिवाल
3. मिर्जा- साहिबां
4. दुल्ला-भट्टी
5. ससि-पुन्नू
2. सोहनी- महिवाल
3. मिर्जा- साहिबां
4. दुल्ला-भट्टी
5. ससि-पुन्नू
आपने चाणक्य नीति तो पढ़ी होगी। इस पुस्तक में उसी की तरह नीति सम्बन्धी कहावतें दी गई है। कुछ कहावतें कृषि से भी सम्बंधित है. सभी का हिन्दी में अनुवाद किया गया है।
ये सभी कहावतें उत्तर भारत में खूब प्रचलित है। ये कहावतें ज्ञान से भरपूर है। ये इंसान को जीवन में सफलता प्राप्त करने में बहुत सहयोग करती है।
उदहारणदेखिये:
जो उधार लेकर कर्ज देता है, जो छप्पर के घर में में ताला लगता है और जो साले के साथ बहिन को भेजता है , घाघ कहते है कि इन तीनो का मुंह काला होता है।
या
हंसकर बात करने वाला ठाकुर(कोतवाल) और खांसने वाला चोर, घाघ कहते है कि इन ससुरो को गहरे पानी में डुबो देना चाहिए।
ये सभी कहावतें उत्तर भारत में खूब प्रचलित है। ये कहावतें ज्ञान से भरपूर है। ये इंसान को जीवन में सफलता प्राप्त करने में बहुत सहयोग करती है।
उदहारणदेखिये:
जो उधार लेकर कर्ज देता है, जो छप्पर के घर में में ताला लगता है और जो साले के साथ बहिन को भेजता है , घाघ कहते है कि इन तीनो का मुंह काला होता है।
या
हंसकर बात करने वाला ठाकुर(कोतवाल) और खांसने वाला चोर, घाघ कहते है कि इन ससुरो को गहरे पानी में डुबो देना चाहिए।
लहरों से डरकर नौका पार नही होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती
डाकू चिढिया एक बहुत ही खतरनाक डाकू है। वो जिससे चिढ जाता है, उसे ही लूट लेता है। और फ़िर उसका सर काट देता है। एक दिन बांकेलाल उसके सामने पड़ जाता है। वो पहले बांकेलाल को लूटता है और फिर .....
इस पुस्तक में हिन्दी के प्रसिद लेखकों की कहानियों का संग्रह है। कुल २७ कहानियाँ इस पुस्तक में है।
हिन्दी साहित्य की सर्वश्रेष्ठ कहानी माने जाने वाली कहानी चंद्रधर शर्मा गुलेरी की "उसने कहा था " से लेकर सहादत हसन मंटो की कहानी "टोबाटेक सिंह " तक और जयशंकर प्रसाद की " आकाशदीप" से लेकर इंशा अल्ला खां द्वारा रचित "रानी केतकी की कहानी " भी इस संग्रह में है।
उम्मीद है आपको ये संग्रह पसंद आयेगा।
हिन्दी साहित्य की सर्वश्रेष्ठ कहानी माने जाने वाली कहानी चंद्रधर शर्मा गुलेरी की "उसने कहा था " से लेकर सहादत हसन मंटो की कहानी "टोबाटेक सिंह " तक और जयशंकर प्रसाद की " आकाशदीप" से लेकर इंशा अल्ला खां द्वारा रचित "रानी केतकी की कहानी " भी इस संग्रह में है।
उम्मीद है आपको ये संग्रह पसंद आयेगा।
"यह कहानी समय की है. इस कहानी का हीरो भी समय है। समय के सिवा कोई इस लायक नही होता कि उसे किसी कहानी का हीरो बनाया जायें।
इस उपन्यास में एक भी गाली नही है। परन्तु शायद यह पूरा उपन्यास एक गाली है। और मैं यह गाली डंके की चोट बक रहा हूँ। यह उपन्यास अश्लील है - जीवन की तरह। "
- राही मासूम रज़ा
इस उपन्यास में एक भी गाली नही है। परन्तु शायद यह पूरा उपन्यास एक गाली है। और मैं यह गाली डंके की चोट बक रहा हूँ। यह उपन्यास अश्लील है - जीवन की तरह। "
- राही मासूम रज़ा





